छत्तीसगढ़

13 साल पुराने भैरव गृह निर्माण समिति घोटाले में वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक गिरफ्तार

Shantanu Roy
8 April 2026 10:20 PM IST
13 साल पुराने भैरव गृह निर्माण समिति घोटाले में वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक गिरफ्तार
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छग
Raipur. रायपुर। 13 साल पुराने भैरव गृह निर्माण समिति घोटाले में तत्कालीन परिसमापक और वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक राजकुमार नायडू को एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW) ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उन्होंने समिति के माध्यम से पूर्व में आबंटित और पंजीकृत 70 प्लॉट्स को अन्य व्यक्तियों को कम दर पर बेचकर लाभ कमाया और उससे प्राप्त राशि को समिति के बैंक खाते में जमा नहीं कराया। घोटाले में आरोप है कि राजकुमार नायडू द्वारा सहकारी गृह निर्माण समिति को 2 करोड़ 4 लाख रुपये का राजस्व हानि पहुंचाई गई। आरोपी 2012 में निलंबित हो चुके थे, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने समिति की 15 लाख रुपये की राशि का गबन किया। इस मामले में EOW में एफआईआर दर्ज की गई थी और अब आरोपी को पुलिस रिमांड पर कोर्ट में पेश किया गया।

भैरव गृह निर्माण समिति के घोटाले में आरोप है कि राजकुमार नायडू ने समिति की संपत्ति और योजना का अनुचित लाभ उठाते हुए सरकारी और सहकारी नियमों का उल्लंघन किया। समिति के प्लॉट्स का अवैध विक्रय और उससे होने वाले राजस्व का गबन एक लंबे समय तक छिपा रहा, लेकिन EOW की जांच के बाद मामला उजागर हुआ। EOW ने कोर्ट में आरोपी को पेश करते हुए कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि आरोपी ने 70 प्लॉट्स का गलत तरीके से लेन-देन किया और संबंधित बैंक लेन-देन को सही तरीके से नहीं दिखाया। इससे सहकारी समिति को बड़े पैमाने पर आर्थिक हानि हुई। इसके अलावा आरोपी ने समिति की 15 लाख रुपये की राशि का व्यक्तिगत उपयोग किया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए EOW ने आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है ताकि जांच को और गहराई से किया जा सके। एजेंसी का कहना है कि आरोपी के अन्य सहयोगियों और लाभार्थियों की पहचान करने के लिए विस्तृत जांच जारी है। इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का संदेश भी दिया गया है। राज्य प्रशासन ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। भैरव गृह निर्माण समिति घोटाला देशभर में सहकारी योजनाओं और उनके प्रशासन में अनियमितताओं की समस्या को उजागर करता है। EOW का कहना है कि आरोपी की रिमांड के दौरान पूरी तरह से वित्तीय और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच की जाएगी, ताकि सभी दोषियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जा सके।
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